एक भूवैज्ञानिक सिद्धांत (geological theory) है जो यह बताता है कि पृथ्वी के महाद्वीप (continents)..
Gaurav
March 24, 2025
महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (कॉन्टिनेंटल ड्रिफ्ट थ्योरी - Continental Drift Theory) क्या है? इस सिद्धांत को किसने और कब प्रतिपादित किया? इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (historical background) भी बताइये।🔗
File 3 Continental Drift Theory Geological and Paleoclimatic Evidence2
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महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory - कॉन्टिनेंटल ड्रिफ्ट थ्योरी) एक भूवैज्ञानिक सिद्धांत (geological theory) है जो यह बताता है कि पृथ्वी के महाद्वीप (continents) समय के साथ एक-दूसरे के सापेक्ष (relative) विस्थापित (drift) हुए हैं, यानी वे एक जगह से दूसरी जगह चले गए हैं।
प्रतिपादक (Proponent): इस सिद्धांत को मुख्य रूप से अल्फ्रेड वेगनर (Alfred Wegener - अल्फ्रेड वेगनर) ने 1912 में प्रतिपादित किया था। वे एक जर्मन मौसम विज्ञानी (meteorologist) और भूभौतिकीविद् (geophysicist) थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background):
प्रारंभिक अवलोकन (Early Observations): 16वीं शताब्दी से ही, मानचित्रकारों (mapmakers) ने अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) के दोनों किनारों पर स्थित महाद्वीपों (दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका) के तटों (coastlines) के बीच समानता देखी थी। उन्हें ऐसा लगा कि ये महाद्वीप कभी एक साथ जुड़े हुए थे।
फ्रांसिस बेकन (Francis Bacon - फ्रांसिस बेकन) (1620): उन्होंने दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के तटों की समानता की ओर इशारा किया।
एंटोनियो स्नाइडर-पेलेग्रिनी (Antonio Snider-Pellegrini - एंटोनियो स्नाइडर-पेलेग्रिनी) (1858): उन्होंने एक नक्शा बनाया जिसमें दिखाया गया था कि अटलांटिक महासागर के दोनों किनारों के महाद्वीप कैसे एक साथ फिट हो सकते हैं।
वेगनर का योगदान (Wegener's Contribution): वेगनर ने इन अवलोकनों (observations) को और विकसित किया और विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों (evidences) को एकत्रित किया जो इस सिद्धांत का समर्थन करते थे कि महाद्वीप एक समय में एक साथ जुड़े हुए थे और बाद में अलग हो गए। उन्होंने इस विशाल महाद्वीप को "पैंजिया" (Pangaea - पैंजिया) नाम दिया, जिसका अर्थ है "सभी भूमि" (all land)।
File 3 Continental Drift Theory Geological and Paleoclimatic Evidence1
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अल्फ्रेड वेगनर (Alfred Wegener) ने महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory) के समर्थन में क्या साक्ष्य (evidence) प्रस्तुत किए? प्रत्येक साक्ष्य को विस्तार से उदाहरण सहित समझाइये।🔗
वेगनर ने अपने सिद्धांत के समर्थन में निम्नलिखित साक्ष्य प्रस्तुत किए:
महाद्वीपों का साम्य (Jigsaw Fit of Continents):
वेगनर ने देखा कि दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के तट आपस में ऐसे मिलते हैं जैसे कि वे एक पहेली (jigsaw puzzle) के टुकड़े हों।
उदाहरण: दक्षिण अमेरिका का पूर्वी तट और अफ्रीका का पश्चिमी तट लगभग पूरी तरह से एक-दूसरे के साथ फिट होते हैं।
जीवाश्म साक्ष्य (Fossil Evidence):
वेगनर ने पाया कि विभिन्न महाद्वीपों पर समान प्रकार के पौधों और जानवरों के जीवाश्म (fossils) पाए जाते हैं, जो अब एक-दूसरे से बहुत दूर हैं। यह इस बात का संकेत था कि ये महाद्वीप कभी एक साथ जुड़े हुए थे।
उदाहरण:
मेसोज़ोअस (Mesosaurus - मेसोज़ोअस): यह एक छोटा जलीय सरीसृप (reptile) था जो पर्मियन काल (Permian period) में रहता था। इसके जीवाश्म केवल दक्षिण अमेरिका और दक्षिणी अफ्रीका में पाए जाते हैं। यह संभव नहीं है कि यह छोटा जीव अटलांटिक महासागर को तैरकर पार कर गया हो।
ग्लोसोप्टेरिस (Glossopteris - ग्लोसोप्टेरिस): यह एक बीज फर्न (seed fern) था जिसके जीवाश्म भारत, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका में पाए जाते हैं।
भूवैज्ञानिक साक्ष्य (Geological Evidence):
वेगनर ने पाया कि विभिन्न महाद्वीपों पर समान प्रकार की चट्टानें (rocks) और पर्वत श्रृंखलाएँ (mountain ranges) पाई जाती हैं, जो अब एक-दूसरे से बहुत दूर हैं।
उदाहरण:
अप्पलाशियन पर्वत (Appalachian Mountains - अप्पलाशियन पर्वत): उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट पर स्थित अप्पलाशियन पर्वत और यूरोप में पाए जाने वाले कैलेडोनियन पर्वत (Caledonian Mountains) संरचना (structure) और आयु (age) में समान हैं।
भारत और अफ्रीका में गोंडवाना चट्टानें (Gondwana Rocks): भारत और अफ्रीका में पाई जाने वाली गोंडवाना चट्टानें समान प्रकार की हैं और एक ही समय में बनी थीं।
वेगनर ने पाया कि कुछ महाद्वीपों पर ऐसे जलवायु के प्रमाण मिलते हैं जो वर्तमान जलवायु से बहुत भिन्न हैं। उदाहरण के लिए, भारत, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में हिमनदों (glaciers) के प्रमाण पाए जाते हैं, जो वर्तमान में भूमध्य रेखा (equator) के पास स्थित हैं। इससे पता चलता है कि ये महाद्वीप कभी दक्षिणी ध्रुव (South Pole) के पास स्थित थे।
उदाहरण: भारत के मध्य भाग में पर्मियन-कार्बोनिफेरस हिमनदी (Permo-Carboniferous glaciation) के प्रमाण पाए जाते हैं, जो यह बताते हैं कि भारत कभी दक्षिणी ध्रुव के निकट था।
File 1 Continental Drift Theory Overview and Continental Fit
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File 2 Continental Drift Theory Fossil Evidence
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महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory) की प्रारंभिक आलोचना (initial criticism) क्या थी? वेगनर के सिद्धांत को उस समय के वैज्ञानिकों ने क्यों स्वीकार नहीं किया?🔗
वेगनर के सिद्धांत की प्रारंभिक आलोचना के मुख्य बिंदु:
बल की कमी (Lack of Mechanism): वेगनर महाद्वीपों को विस्थापित करने वाले बल (force) के लिए कोई संतोषजनक तंत्र (mechanism) नहीं बता सके। उन्होंने सेंट्रीफ्यूगल बल (centrifugal force - अपकेन्द्रीय बल) और ज्वारीय बल (tidal force) का सुझाव दिया, लेकिन ये बल महाद्वीपों को स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली नहीं थे।
महाद्वीपों का "बहना" (Continents "Plowing" Through Oceanic Crust): उस समय के भूवैज्ञानिकों का मानना था कि महाद्वीपीय परत (continental crust), महासागरीय परत (oceanic crust) से बनी है और सियाल (sial - सिलिकॉन और एल्यूमीनियम से बनी) महासागरीय परत सिमा (sima - सिलिकॉन और मैग्नीशियम से बनी) से हल्की होती है। इसलिए, सियाल सिमा पर तैरती है। वेगनर का यह सुझाव कि महाद्वीप, महासागरीय पर्पटी (oceanic crust) को "चीरते" हुए आगे बढ़ते हैं, उस समय के भौतिकी (physics) के नियमों के विरुद्ध था, क्योंकि महासागरीय पर्पटी, महाद्वीपीय पर्पटी से अधिक कठोर होती है।
अन्य व्याख्याएँ (Alternative Explanations): उस समय, जीवाश्मों और भूवैज्ञानिक समानताओं की व्याख्या के लिए अन्य सिद्धांत मौजूद थे, जैसे कि भूमि सेतु (land bridges) जो महाद्वीपों को जोड़ते थे और फिर डूब गए।
इन आलोचनाओं के कारण, वेगनर के सिद्धांत को उनके जीवनकाल में व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया।
continental drift mechanism rejection
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प्लेट टेक्टोनिक्स सिद्धांत (Plate Tectonics Theory) क्या है? यह महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory) से कैसे संबंधित है और यह उसकी कमियों को कैसे दूर करता है?🔗
प्लेट टेक्टोनिक्स सिद्धांत (Plate Tectonics Theory) एक आधुनिक भूवैज्ञानिक सिद्धांत है जो पृथ्वी के स्थलमंडल (lithosphere - पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत, जिसमें भूपर्पटी (crust) और ऊपरी मेंटल (upper mantle) का ठोस भाग शामिल है) की बड़े पैमाने पर गति (large-scale motion) की व्याख्या करता है।
प्लेट टेक्टोनिक्स सिद्धांत के मुख्य बिंदु:
प्लेटें (Plates): पृथ्वी का स्थलमंडल कई बड़ी और छोटी प्लेटों में विभाजित है। ये प्लेटें एस्थेनोस्फीयर (asthenosphere - दुर्बलतामंडल, ऊपरी मेंटल का एक कमजोर, प्लास्टिक जैसा परत) पर "तैरती" हैं।
प्लेटों की गति (Plate Motion): ये प्लेटें लगातार धीमी गति से चलती रहती हैं, कुछ मिलीमीटर से लेकर कुछ सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से।
प्लेट सीमाएँ (Plate Boundaries): प्लेटों की गति के कारण, प्लेट सीमाएँ (plate boundaries) तीन प्रकार की होती हैं:
अपसारी सीमाएँ (Divergent Boundaries): जहाँ प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं, जैसे कि मध्य-अटलांटिक कटक (Mid-Atlantic Ridge)। यहाँ नई महासागरीय पर्पटी (oceanic crust) बनती है।
अभिसारी सीमाएँ (Convergent Boundaries): जहाँ प्लेटें एक-दूसरे की ओर आती हैं। यहाँ एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे दब जाती है (subduction - सबडक्शन), जिससे ज्वालामुखी (volcanoes) और पर्वत श्रृंखलाएँ बनती हैं।
रूपांतर सीमाएँ (Transform Boundaries): जहाँ प्लेटें एक-दूसरे के बगल में खिसकती हैं, जैसे कि कैलिफ़ोर्निया में सैन एंड्रियास फॉल्ट (San Andreas Fault)।
संबंध (Relation to Continental Drift Theory):
प्लेट टेक्टोनिक्स सिद्धांत, महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत का एक विस्तारित और अधिक पूर्ण संस्करण है। वेगनर सही थे कि महाद्वीप विस्थापित होते हैं, लेकिन वे उस तंत्र (mechanism) को नहीं समझा पाए जिसके द्वारा यह होता है। प्लेट टेक्टोनिक्स सिद्धांत इस तंत्र को स्पष्ट करता है: महाद्वीप वास्तव में प्लेटों के भाग हैं, और प्लेटों की गति के साथ ही महाद्वीप भी विस्थापित होते हैं।
कमियों को दूर करना (Addressing Shortcomings):
बल का स्रोत (Source of Force): प्लेट टेक्टोनिक्स सिद्धांत में, प्लेटों की गति का मुख्य कारण एस्थेनोस्फीयर (asthenosphere) में संवहन धाराएँ (convection currents) हैं। मेंटल (mantle) में गर्म पदार्थ ऊपर उठता है, ठंडा होता है, और फिर नीचे डूब जाता है, जिससे एक संवहन चक्र (convection cell) बनता है। ये संवहन धाराएँ प्लेटों को खींचती और धकेलती हैं।
महाद्वीपों की गति: प्लेट टेक्टोनिक सिद्धांत, महाद्वीपों के "बहने " कि समस्या को ख़त्म करता है, क्युकी इस सिद्धांत के अनुसार महाद्वीप महासागरीय क्रस्ट को चीरते हुए आगे नहीं बढ़ते, बल्कि, महाद्वीप और महासागरीय क्रस्ट, दोनों ही प्लेटो के भाग है, और प्लेटो के गति के साथ गति करते है।
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